अक्षय शर्मा की पहल से हल्का उत्तरी 150 बसों के जरिए 12000 श्रद्धालुओं ने टेका फतेहगढ़ साहिब माथा

चंडीगढ़/अमृतसर ( मिडिया जंक्शन/चेतन शर्मा/सोहन रावत):-: श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों साहिबजादों एवं माता गुजरी जी की लासानी शहादत को समर्पित “सफर-ए-शहादत” के तहत हल्का उत्तरी से सेवादार एवं भाजपा नेता अक्षय शर्मा की ओर से शुरू की गई फ्री बस सेवा ने सांझी वार्ता और भाईचारे का मजबूत संदेश दिया। सात दिनों तक चले इस सेवा कार्य के दौरान कुल 150 बसों के माध्यम से लगभग 12,000 श्रद्धालुओं ने श्री फतेहगढ़ साहिब पहुंचकर माथा टेका।

इस धार्मिक एवं सामाजिक पहल का समापन आज हुआ, जिसमें अंतिम दिन 40 बसें श्रद्धालुओं को लेकर रवाना की गईं। इस सेवा में जहां बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालु शामिल हुए, वहीं हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई और इस पहल के लिए अक्षय शर्मा की सराहना की।

इस अवसर पर अक्षय शर्मा ने कहा कि इस सेवा की शुरुआत उन्होंने आज की युवा पीढ़ी को सिख इतिहास की महानता से अवगत कराने के उद्देश्य से की थी। उन्होंने कहा कि साहिबजादों ने धर्म की रक्षा के लिए जिस अद्वितीय वीरता और बलिदान का परिचय दिया, उसे केवल याद ही नहीं बल्कि समझना भी जरूरी है।

उन्होंने बताया कि शुरुआत में इस सफर को सीमित बसों के साथ करने की योजना थी, लेकिन सेवा से जुड़ते हाथों ने इसे विशाल रूप दे दिया। ढिल्लों बस सर्विस और औलख बस सर्विस ने निःशुल्क बसें उपलब्ध कराईं, वहीं शोभित बब्बर ने ईंधन और कई सहयोगियों ने अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग दिया।

अक्षय शर्मा ने कहा कि देश-विदेश और पूरी दुनिया में ऐसी लासानी शहादत न पहले कभी हुई है और न ही भविष्य में होगी। उन्होंने उन सभी श्रद्धालुओं और सेवादारों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने गुरु साहिब की पावन धरती फतेहगढ़ साहिब पहुंचकर नतमस्तक होने के साथ-साथ इस छोटे से प्रयास को सफल बनाया।

उन्होंने कहा कि धर्म हमें आपसी प्रेम, भाईचारे और एक-दूसरे के साथ खड़े होने की सीख देता है। आज पंजाब को पंजाबियत बचाने के लिए आपसी सौहार्द और एकता की आवश्यकता है। सभी धर्म मानवता और भाईचारे को मजबूत करने का संदेश देते हैं।

कार्यक्रम के दौरान सिख, हिंदू मुस्लिम और ईसाई धर्मों के अनुयायियों ने एक साथ अरदास कर परमात्मा के समक्ष नतमस्तक होकर प्रार्थना की कि युवाओं को सही मार्ग दिखाया जाए, उन्हें नशे और बुराइयों से दूर रखकर सेवा, त्याग और भाईचारे की भावना से जोड़ा जाए।

अंत में गतका प्रदर्शन किया गया ओर बोले सो निहाल के जयकारों के साथ श्रद्धालुओं को फतेहगढ़ साहिब में गुरु साहिब के समक्ष नतमस्तक होने के रवाना किया गया।

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