चंडीगढ़ की आधी आबादी बेहाल: लाल डोरा, नीड बेस्ड चेंज और मालिकाना हक पर प्रशासन की चुप्पी बनी जी का जंजाल — राजबीर सिंह भारतीय

चंडीगढ़/मनीमाजरा ( मीडिया जंक्शन-):-: प्रसिद्ध समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्र सरकार से शहर के हजारों परिवारों को राहत देने के लिए लंबे समय से लंबित मुद्दों पर तुरंत फैसला लेने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने कहा कि लाल डोरा विस्तार, नीड बेस्ड चेंज, और टेनमेंट हाउस में मालिकाना हक जैसे गंभीर विषयों पर स्पष्ट नीति न होने के कारण शहर की आधी से ज्यादा आबादी आज डर और अनिश्चितता के साए में जीने को मजबूर है। प्रशासन की देरी और स्पष्ट नीति के अभाव के कारण हजारों परिवार मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेल रहे हैं।

​भारतीय ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया:

नीड बेस्ड चेंजेज (Need Based Changes): शहर के हजारों मकान मालिक इस भंवर में फंसे हुए हैं। परिवारों की बढ़ती जरूरतों के अनुसार किए गए छोटे-मोटे बदलावों को प्रशासन ‘अवैध’ मान रहा है। राजबीर सिंह भारतीय ने मांग की कि इन बदलावों को वन-टाइम सेटलमेंट के तहत नियमित (Regularize) किया जाना चाहिए ताकि लोगों को डेमोलिशन और जुर्माने के नोटिसों से मुक्ति मिले। उन्होंने मांग की कि सरकार को बिना किसी देरी के एक मुश्त सेटलमेंट (One-time Settlement) पॉलिसी लानी चाहिए ताकि हजारों मकान मालिकों को राहत मिल सके और उनके सिर पर लटक रही तोड़फोड़ की तलवार हटे।

​लाल डोरा और संपत्ति पंजीकरण: गांवों में लाल डोरा की सीमा न बढ़ने से लोग अपने ही घरों में बुनियादी सुविधाओं और ऋण सुविधाओं से वंचित हैं। लाल डोरे के बाहर बनी संपत्तियों का पंजीकरण (Registration) न होना एक बड़ी समस्या है, जिसका समाधान तुरंत जरूरी है। संपत्तियों का पंजीकरण (Registration) और हस्तांतरण रुकने से आम आदमी अपनी ही गाढ़ी कमाई से बनाई गई संपत्ति का उपयोग नहीं कर पा रहा है।

​टेनमेंट हाउस में मालिकाना हक: पुनर्वास कॉलोनियों और टेनमेंट हाउस में रहने वाले हजारों परिवार दशकों बाद भी मालिकाना हक के लिए तरस रहे हैं। उन्हें लीज होल्ड से फ्री होल्ड का अधिकार मिलना चाहिए।

​औद्योगिक क्षेत्र की समस्याएं: चंडीगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में कन्वर्जन पॉलिसी और पुराने नियमों के कारण व्यापार ठप हो रहा है। एमएसएमई (MSME) सेक्टर को बचाने के लिए यहां नीतियों में लचीलापन लाना अनिवार्य है।
भारतीय ने कहा कि
“प्रशासन को समझना होगा कि शहर केवल इमारतों से नहीं, लोगों से बनता है। अगर आधी आबादी ही अपनी छत को लेकर असुरक्षित महसूस करेगी, तो यह ‘सिटी ब्यूटीफुल’ के नाम पर धब्बा है। मैं प्रशासन से अपील करता हूँ कि इन फाइलों को अलमारियों से निकालकर जल्द से जल्द धरातल पर फैसला सुनाया जाए।”
उन्होंने आगे कहा कि
​”प्रशासन की फाइलों में दबे ये मुद्दे केवल कागज नहीं, बल्कि लाखों लोगों की भावनाएं और उनकी मेहनत की कमाई हैं। शहर का विकास तभी सार्थक है जब यहां का निवासी मानसिक शांति के साथ अपने घर में रह सके।” > — राजबीर सिंह भारतीय, समाजसेवी

राजबीर सिंह भारतीय ने सरकार प्रशासन से अनुरोध किया है कि प्रशासन इन संवेदनशील मुद्दों पर जल्द ही कोई सकारात्मक कदम उठाये, उन्होंने आगे कहा कि बेवजह के जनता-जनार्दन के अंदोलन से प्रशासन को बचना चाहिए। उन्होंने माननीय प्रशासक महोदय से भी अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और चंडीगढ़ के निवासियों को राहत प्रदान करने का काम करें।

चंडीगढ़ प्रशासन की सुस्ती से आधी आबादी परेशान: लाल डोरा, नीड बेस्ड चेंज और मालिकाना हक पर तुरंत निर्णय ले सरकार – राजबीर सिंह भारतीय।

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