पंचकूला, (मीडिया जंक्शन-/विक्रांत शर्मा):: शिक्षक दिवस के इस विशेष अवसर पर, हम प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और ताइक्वांडो शिक्षिका, मास्टर अमिता मारवाह, को सम्मानित करते हैं, जो अनगिनत युवाओं के लिए एक सच्ची प्रेरणा हैं। पिछले 13 वर्षों से, उन्होंने खुद को वंचित छात्रों को ऊपर उठाने के लिए समर्पित किया है, न केवल खेल में, बल्कि जीवन के सभी पहलुओं में—शिक्षा, पाठ्येतर गतिविधियों और सबसे महत्वपूर्ण, स्वतंत्र, सक्षम व्यक्ति बनने में।
अमिता मारवाह का मकसद सरल है, फिर भी गहरा है: वह हर उस छात्र को सशक्त बनाना चाहती हैं जिसे वह पढ़ाती हैं, खासकर उन लोगों को जिनके पास अपने सपनों को पूरा करने का साधन नहीं है। उनका मानना है कि एक शिक्षक का कर्तव्य एक ऐसा वातावरण बनाना है जहाँ बच्चे वास्तव में बढ़ सकें और पनप सकें। उनका मानवीय कार्य इस दर्शन का एक प्रमाण है, और जिन जिंदगियों को उन्होंने छुआ है, वे खुद बोलती हैं।
उनके पूर्व छात्रों की कहानियाँ:
* बिशनु: एक समय नशे की लत से जूझ रहे थे, लेकिन मैम के मार्गदर्शन और समर्थन से आज एक सफल ताइक्वांडो कोच और क्लाउड किचन मैनेजर हैं।
* प्रियंका: बहुत गरीब परिवार से हैं। परिवार के साथ-साथ वह खुद भी पार्ट-टाइम काम करती हैं। मैम के समर्थन से उन्होंने ताइक्वांडो में कई मेडल जीते हैं और अब कंप्यूटर कोर्स भी कर रही हैं। मैम ने उन्हें पढ़ाई और खेल दोनों में मदद की।
* नेहा: कहती हैं कि उन्होंने स्पोर्ट्स इसलिए चुना क्योंकि वह महंगे संस्थानों की फीस नहीं दे सकती थीं। मैम की मुफ्त कक्षाओं के कारण ही वह ताइक्वांडो सीख पाईं और एक इंटर-स्कूल मेडलिस्ट बनीं।
* सोनू: का कहना है कि मैम ने सही समय पर मार्गदर्शन किया, वरना वह दिन भर आवारागर्दी करते रहते थे। मैम की प्रेरणा से उन्होंने मेडिकल लैबोरेट्री का कोर्स किया और राज्य व राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट खेले। आज वह एक सफल कोच हैं, लैबोरेट्री में काम करते हैं और अपने घर के लिए जमीन भी खरीद चुके हैं।
* युसूफ: मैम की सही सलाह की वजह से आज वह आर्मी में हैं। मैम ने आर्मी के फिजिकल और रिटन एग्जाम्स क्लियर करने में उनका साथ दिया, क्योंकि उनकी हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही कमजोर थीं।
* निखिल: मैम ने उन्हें आत्मरक्षा की ऐसी ट्रेनिंग दी कि उनका मन मार्शल आर्ट्स में ही लग गया। मैम ने उन्हें बीएसएफ में जाने और मेहनत करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने मैम की सलाह मानी और आज वह बीएसएफ में सेवा दे रहे हैं।
मास्टर अमिता मारवाह का अपने छात्रों के प्रति अटूट समर्पण यह साबित करता है कि एक शिक्षक का प्रभाव कक्षा से कहीं आगे जाता है, और यह न केवल करियर बल्कि भाग्य को भी आकार देता है। वह वास्तव में एक ऐसी शिक्षिका की भावना को दर्शाती हैं जो अपने छात्रों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए सब कुछ देती है।
एक प्रेरणादायक शिक्षिका: मास्टर अमिता मारवाह की कहानी
