मनीमाजरा(मीडिया जंक्शन-):-
इस बार दिवाली को लेकर बहुत संशय है कि दिवाली 20 को है या 21 अक्टूबर को इस में कोई संशय नहीं की दिवाली 21 को ही है क्योंकि प्रदोष ( सूर्यास्त के बाद त्रिमुहुर्त ) व्यापिनी कार्तिक अमावस्या के दिन दीपावली मनाने की शास्त्राज्ञा है। इस दिन प्रदोष में लोग लक्ष्मी पूजन करते है दोनों दिन प्रदोष में अमा का अभाव होने पर दूसरे दिन लक्ष्मी पूजन करना चाहिए। यह कहना है कि मनसा देवी मंदिर के सहायक पुजारी आचार्य शंकर गौतम का।
उनका कहना कि “परदिन एव, दिनद्वये वा प्रदोषव्यातौ परा पूर्वत्रैव प्रदोषव्याप्तौ लक्ष्मीपूजादौ पूर्वा, अभ्यंगस्नानादौ परा, एवमुभयत्र प्रदोषव्याप्त्यभावेऽपि।” दोनों दिन प्रदोष में अमा की व्याप्ति या अव्याप्ति होने पर दीपावली दूसरे ही दिन मनाई जाए यही शास्त्रकारों का अन्तिम निर्णय है।
“दिनद्वये सत्त्वासत्त्वे परा ।
प्रदोषव्याप्तौ परा पूर्वा ।
नास्ति तिथ्यां विशेषः कश्चित्” (तिथिनिर्णयः)
“पूर्वत्रैव व्याप्तिरिति पक्षे परत्र यामत्रयाधिकव्यापिदर्शे दर्शापेक्षया प्रतिपद्वृद्धिसत्त्वे लक्ष्मीपूजादिकमपि परत्रैवेत्युक्तम्। एतन्मते उभयत्र प्रदोषव्याप्ति-पक्षेपि परत्र दर्शस्य सार्धयामत्रयाधिक-व्याप्ति-त्वात्परैव युक्तेति भाति” ।। (पुरुषार्थ-चिन्तामणि)
अर्थात् यदि अमावस्या केवल पहिले दिन ही प्रदोषकाल को व्याप्त हो तथा अगले दिन अमावस्या साढ़े तीन प्रहर से अधिक व्याप्त हो एवं अगले दिन भी अमावस्या तिथि वृद्विगामिनी होकर तीन प्रहर के उपरान्त समाप्त हो रही हो, तो दूसरे दिन अर्थात् अमावस्या के दिन लक्ष्मीपूजन करना चाहिए। इस वर्ष (सं. 2082 वि. में) 20 अक्तू., 2025 ई. को कार्त्तिक अमा 15 घं. 45 मि. बाद शुरु होकर 21 अक्तू., 2025 ई. को 17 घं. 55 मि. तक प्राप्त हो रही है। यह अमा दोनों दिन प्रदोषव्यापिनी है। अतः उपरोक्त नियमानुसार हमने ”दीपावली” पर्व दूसरे दिन यानी 21 अक्तू., 2025 ई. को मनाना सर्वथा शास्त्रसम्मत है।
उन्होंने बताया कि ”श्री मार्त्तण्ड पंचाग, शताब्दी पंचांग, निर्णय सागर, पंचांग दिवाकर , श्रीधर आदि और भी अन्य पंचांग देख सकते हैं, जो 21 अक्टूबर, 2025 ई. को ही दीपावली मनाने के पक्ष में हैं दीपावली निर्णय धर्मशास्त्र अनुसार पूरी तरह से सही है। अतः दिवाली 21 अक्तूबर, 2025 ई. को ही मनाई जाएगी, न कि 20 अक्टूबर को। आपको इसमें बिल्कुल भी भ्रांत होने की जरूरत नहीं है।
