प्रभु राम और सीता माता की जोड़ी की जितनी उपमा की जाये वो कम है : श्री कुमार स्वामी जी

चंडीगढ़/पंचकूला (मीडिया जंक्शन-/विक्रांत शर्मा)::

“कुअँरु कुअँरि कल भावँरि देहीं, नयन लाभु सब सादर लेहीं | जाइ न बरनि मनोहर जोरी, जो उपमा कछु कहौं सो थोरी | अर्थात श्री राम और माता सीता सुंदर भाँवरें दे रहे हैं। सब लोग उनकी जोड़ी को निहार रहे हैं । श्री राम और माता सीता की मनोहर जोड़ी का वर्णन नहीं हो सकता, उसकी जितनी उपमा की जाये वो भी कम है |” ये बात जगदगुरु महा ब्रह्मऋषि श्री कुमार स्वामी जी महाराज ने पंचकूला के सेक्टर 5 स्थित इंद्रधनुष सभागार में जड़ों से जुड़ो स्वयंसेवी संस्था द्वारा महिलाओं द्वारा आयोजित श्री राम लीला के तीसरे दिन के आयोजन के दौरान कही |
इस मौके पर संस्था की संस्थापक एकता नागपाल और राम लीला आयोजन समिति के अध्यक्ष अरुण सूद ने बताया कि कार्यक्रम में जगदगुरु महा ब्रह्मऋषि श्री कुमार स्वामी जी महाराज, गौरव गौतम, खेल मंत्री हरियाणा और चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ आई पी एस, आई जी पुलिस, पुष्पेंद्र कुमार ने मुख्यातिथि के रूप में भाग लिया और दीप प्रज्वल्लित कर रामलीला के तीसरे दिन के आयोजन का उद्घाटन किया | महिलाओं ने सीता स्वयंवर, लक्ष्मण परशुराम संवाद, राम विवाह और राम विवाह उपरान्त अयोध्या आगमन पर कलाकारों ने बहुत ही बेहतरीन ढंग से झलकियों को प्रस्तुत किया जिसको देखने के लिए हजारों लोगों ने इसमें भाग लिया |
इस अवसर पर मुख्यातिथि जगदगुरु महा ब्रह्मऋषि श्री कुमार स्वामी जी महाराज ने कहा कि भगवान् श्री राम और माता सीता सर्वगुण सम्पन्न हैं | प्रेम,तप, त्याग, परोपकार, अनुशासन में रहना, हर परिस्थिति में एक दूसरे का साथ निभाना, माता पिता और गुरु की सेवा करना और उनकी आज्ञा को अपना धर्म मानना, सभी को समानता की दृष्टि से देखना, आपने आचार और व्यवहार को सादा व् सभी के लिए एकसमान रखना ही उनके जीवन से हम सभी को ये सीखने को मिलता है | उन्होंने भगवान् होकर भी मानव का अवतार लेकर एक मानव की तरह ही उसको निभाया ये भी उनके आदर्श जीवन का अमूल्य गहना है |

अपने उद्बोधन में मुख्यातिथि खेल मंत्री हरियाणा ने कहा कि राजा जनक द्वारा पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम ने जब भगवान् परशुराम द्वारा दिए गए अमूल्य शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई तो उसके टूटने के उपरान्त भगवान् परशुराम के क्रोध को शांत करने में जिस भाव से क्षमा याचना की वो अवर्णीय है | उनके इस भाव से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए कि क्षमा मांगने से कोई छोटा और बड़ा नहीं होता | किसी के सम्मान को यदि ठेस पहुंचे तो हमें तुरंत उस से माफ़ी मांगनी चाहिए और अपने आदर्श जीवन का परिचय देना चाहिए | ये सब सीख देना ही हमारे वेद पुराण धार्मिक ग्रंथों का मूल मन्त्र है |
इस दौरान मुख्यातिथि चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ आई पी एस, आई जी पुलिस, पुष्पेंद्र कुमार ने प्रभु श्री राम के जीवन पर आधारित घटनाओं का वर्णन करते हुए कहा कि उन्होंने अपना समस्त जीवन दूसरों को समर्पित किया | राम ने विवाह के उपरान्त सीता माता के पिता जनक और उनकी माता को अपने पिता दशरथ और माता कौशल्या के सामान बराबर का स्थान दिया | उन्होंने इस बात का सन्देश दिया कि जीवन में पत्नी के माता पिता भी सम्मान के उतने भागीदार हैं जितने उसके पति के माता पिता | हमारे धर्म के सभी शास्त्र, देवी देवता, ऋषिगण आदि ने हम सभी को समझाया कि नर और नारी एक समान हैं | जब इनके बीच स्वयं भगवान् और शास्त्रों आदि ने कोई भेद नहीं किया बराबरी का दर्जा दिया तो फिर हम सभी भी इसी विचार को लेकर नारी को बराबर मान कर उसको भी उतना ही मान सम्मान देना चाहिए जितना कि पुरुष को |

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