चंडीगढ़ ( मीडिया जंक्शन-/ विक्रांत शर्मा):-
पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय न्यूरो-क्रिटिकल केयर सम्मेलन **ब्रेन वेव्स–2026** में पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि सशस्त्र बलों ने अनुशासन, त्वरित निर्णय और मजबूत व्यवस्था के माध्यम से क्रिटिकल केयर चिकित्सा को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि पीजीआईएमईआर और सशस्त्र बलों का यह सहयोग नागरिक और सैन्य—दोनों क्षेत्रों में आपात न्यूरो देखभाल को मजबूत कर रहा है।
उन्होंने बताया कि न्यूरो से जुड़ी आपात स्थितियों में समय सबसे अहम होता है। *गोल्डन आवर* के दौरान लिया गया सही और तेज फैसला मरीज के जीवन और स्थायी नुकसान के बीच फर्क तय करता है। सेना चिकित्सा सेवाओं के साथ मिलकर पीजीआईएमईआर बेहतर, तेज और समन्वित इलाज प्रणाली विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि **ब्रेन वेव्स–2026** जैसे सम्मेलन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को एक-दूसरे से सीखने और बेहतर तैयारी का अवसर देते हैं।
यह सम्मेलन पीजीआईएमईआर द्वारा **सोसाइटी फॉर इमरजेंसी, ट्रॉमा एंड डिजास्टर (SETD)**, **सोसाइटी फॉर क्रिटिकल केयर नर्सिंग (SCCN)**, स्ट्रोक सेवाओं और न्यूरोलॉजी विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया। इसमें देश के **16 एम्स**, भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना, पुलिस सेवाओं और हरियाणा सरकार से लगभग **300 डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मियों** ने भाग लिया।
सम्मेलन का विषय **“गोल्डन आवर और उसके बाद: न्यूरो आपात स्थितियों में समय से मुकाबला”** रहा, जिसमें स्ट्रोक, सिर की चोट और अन्य गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में समय पर इलाज के महत्व पर चर्चा की गई।
अकादमिक सत्रों में पीजीआईएमईआर और अन्य प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। चर्चाओं में गोल्डन आवर प्रबंधन, आपात सेवाओं के बीच तालमेल, मरीजों को समय पर अस्पताल पहुँचाने और इलाज व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
मुख्य वक्ताओं में पीजीआईएमईआर के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट **प्रो. धीरज खुराना**, **मेजर जनरल हरकिरत सिंह**, कमांड हॉस्पिटल; **डॉ. नवदीप**, सलाहकार, सड़क सुरक्षा, पंजाब सरकार और **डॉ. रमन शर्मा**, अस्पताल प्रशासन, पीजीआईएमईआर शामिल रहे।
मेजर जनरल हरकिरत सिंह ने कहा कि सशस्त्र बलों ने हमेशा आपात चिकित्सा, प्रशिक्षण और त्वरित प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पीजीआईएमईआर जैसे संस्थानों के साथ सहयोग से जटिल न्यूरो आपात स्थितियों से बेहतर ढंग से निपटा जा सकता है, जिससे आम लोगों को भी लाभ मिलता है।
डॉ. नवदीप ने कहा कि न्यूरोलॉजिकल आपात स्थितियों में समय पर पुलिस, एंबुलेंस और अस्पतालों के बीच तालमेल बेहद जरूरी है। तेज कार्रवाई और सही समन्वय से मरीज की जान बचाई जा सकती है और स्थायी नुकसान को रोका जा सकता है।
सम्मेलन की खास बात तीन **हैंड्स-ऑन कार्यशालाएँ** रहीं।
**स्ट्रोक सिमुलेशन कार्यशाला** में डॉक्टरों को थ्रोम्बोलाइसिस जैसे इलाज का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
**ट्रॉमा और न्यूरो-सर्जरी कार्यशाला** में गंभीर चोटों में तुरंत सर्जरी और टीमवर्क पर जोर दिया गया।
**पीडियाट्रिक और नियोनेटल क्रिटिकल केयर कार्यशाला** में बच्चों और नवजातों की आपात देखभाल पर चर्चा की गई।
इन कार्यशालाओं में आधुनिक तकनीक और व्यावहारिक अभ्यास के जरिए डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का आत्मविश्वास बढ़ाया गया।
शैक्षणिक गुणवत्ता और उपयोगी चर्चाओं के साथ **ब्रेन वेव्स–2026** का समापन हुआ। सम्मेलन ने यह स्पष्ट किया कि पीजीआईएमईआर और सशस्त्र बल मिलकर देश में आपात न्यूरो देखभाल को और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं, ताकि समय पर सही इलाज से अधिक से अधिक जीवन बचाए जा सकें।
