श्रीमद भागवत कथा के प्रथम दिवस का शुभारंभ श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ शुरू हुआ

पंचकूला मीडिया (जंक्शन- विक्रांत):-

पंचकूला प्राचीन काली माता मंदिर सेक्टर 20 में श्री बांके बिहारी ट्रस्ट द्वारा आयजि श्रीमद् भागवत कथा का प्रथम दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ किया गया। कथा व्यास श्री1008 महामंडलेश्वर विश्वामित्रनंद गिरी जी महाराज ने कार्यक्रम का प्रारंभ विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं मंगलाचरण किया ।प्रथम दिन किं कथा में व्यास जी ने बतायाश्रीमद् भागवत महात्म्य में वर्णित धुंधकारी की कथा अत्यंत प्रभावशाली है, जो यह दर्शाती है कि निष्ठापूर्वक सुनी गई भगवत कथा घोर पापी को भी मोक्ष दिला सकती है। आत्मदेव की पत्नी धुंधली के पापी पुत्र धुंधकारी ने अत्याचारों की पराकाष्ठा की, जिससे प्रेत बन जाने के बाद, उसके भाई गोकर्ण द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सुनकर उसे मुक्ति मिली।
कथा का विवरण:
धुंधकारी का जन्म और कुकर्म: तुंगभद्रा नदी के तट पर आत्मदेव नामक ब्राह्मण की पत्नी धुंधली बहुत ही ईर्ष्यालु और दुष्ट प्रवृत्ति की थी। गर्भ के डर से उसने फल नहीं खाया और गाय को खिला दिया, जिससे प्रेत योनि में उत्पन्न धुंधकारी अत्यंत हिंसक, क्रोधी और वेश्यागामी था।
अत्याचार और मृत्यु: धुंधकारी ने धन के लिए अपने पिता आत्मदेव को प्रताड़ित किया और माँ को भी नहीं छोड़ा। अंत में कुएं में कूदकर उसकी माँ धुंधली की मृत्यु हो गई।
प्रेत योनि और मुक्ति: अपने कुकर्मों के कारण धुंधकारी भयानक प्रेत बन गया। उसके भाई गोकर्ण ने गया में पिंडदान किया, लेकिन प्रेत योनि से मुक्ति नहीं मिली। तब सूर्यदेव के निर्देश पर, गोकर्ण ने सात दिनों तक श्रीमद् भागवत कथा सुनाई, जिससे धुंधकारी की प्रेत आत्मा मुक्त होकर दिव्य रूप में भगवान के धाम चली गई।
कथा का संदेश: यह कथा स्पष्ट करती है कि कितना भी बड़ा पापी क्यों न हो, यदि श्रद्धापूर्वक सात दिनों तक श्रीमद्भागवत का श्रवण किया जाए, तो उसे निश्चित ही मोक्ष मिलता कथा कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान के नाम-स्मरण से वातावरण भक्तिमय हो गया।
महाराज जी ने प्श्रीमद् भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह कथा मानव जीवन को सद्मार्ग की ओर प्रेरित करती है तथा समाज में नैतिक मूल्यों और संस्कारों को सुदृढ़ करती है। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने मात्र से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है।
कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, मातृशक्ति एवं युवाओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए आगामी दिनों में भी अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण करने का आग्रह किया।
पूरे कथा स्थल को आकर्षक रूप से सजाया गया है तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उचित व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रथम दिवस का समापन आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ

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