श्री सद्गुरुदेव भगवान ही वह दिव्य शक्ति हैं, जो अपने शिष्य और सेवक-भक्त को पलक झपकते ही भवसागर से पार उतारने में समर्थ हैं” — पूज्य स्वामी दर्शनभिक्षु: जी महाराज

कुरुक्षेत्र (मीडिया जंक्शन/विक्रांत शर्मा):

(सद्गुरु महिमा से गुंजायमान हुआ श्री गीता धाम, व्यास पूजा में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब)
विश्वविख्यात धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र स्थित श्री गीता धाम आश्रम में व्यास पूजा (गुरुपूजा) महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से पधारे सैकड़ों श्रद्धालु गुरु चरणों में नतमस्तक हुए तथा भजन-कीर्तन, सुंदरकांड पाठ और गुरु महिमा के रस में सराबोर होकर देर तक झूमते रहे। पूरा आश्रम “जय गुरुदेव” के जयघोष और भक्ति की अलौकिक तरंगों से गुंजायमान रहा।
आश्रम की व्यवस्थापिका पूज्य स्वामी श्री दर्शनभिक्षु: जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी आशीर्वचनों में कहा कि “श्री सद्गुरुदेव भगवान ही वह विलक्षण दिव्य शक्ति हैं, जो अपने सेवक-भक्त को पलक झपकते ही भवसागर से पार उतारने की क्षमता रखते हैं। जिस व्यक्ति के जीवन में सच्चे गुरु का प्रकाश नहीं, उसका आध्यात्मिक जीवन अभी प्रारंभ ही नहीं हुआ।”
उन्होंने कहा कि जो साधक निष्कपट भाव से स्वयं को अपने सद्गुरु के श्रीचरणों में पूर्णतः समर्पित कर देता है, उसके जीवन की प्रत्येक चिंता स्वयं सद्गुरुदेव भगवान करते हैं। गुरु की कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है तथा भक्त का जीवन शांति, संतोष, आनंद और आत्मिक उन्नति से परिपूर्ण हो जाता है।
गुरु महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने संत कबीरदास जी का प्रसिद्ध दोहा सुनाया—
“यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान।
शीश दिए जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान॥”
उन्होंने कहा कि गुरु ही वह दिव्य प्रकाश हैं जो अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर जीवात्मा को परमात्मा से मिलाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। गुरु का सान्निध्य मनुष्य के जीवन में नई चेतना, नई ऊर्जा और आत्मिक जागरण का संचार करता है।
कार्यक्रम के अनुसार सर्वप्रथम गुरु दरबार में सामूहिक सुंदरकांड पाठ हुआ। तत्पश्चात अंबाला से आमंत्रित भजन मंडली ने मधुर एवं भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। इसके बाद श्री बालाजी परिवार, कुरुक्षेत्र तथा चक्रवर्ती मोहल्ला की भजन मंडलियों ने एक से बढ़कर एक भजनों की ऐसी प्रस्तुति दी कि पूरा पंडाल गुरु भक्ति के रंग में रंग गया। युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सभी भजनों पर भावविभोर होकर झूमते रहे तथा गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा समर्पित करते दिखाई दिए।
व्यास पूजा महोत्सव में श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक रही कि आश्रम परिसर पूरी तरह भर गया। अनेक भक्तों ने बाहर खड़े होकर ही भजन-कीर्तन का आनंद लिया। पूरा वातावरण गुरु भक्ति, सेवा, प्रेम और समर्पण की अद्भुत अनुभूति से ओत-प्रोत दिखाई दिया।
श्री गीता धाम आश्रम, कुरुक्षेत्र, परम पूज्य स्वामी श्री गीतानन्द जी महाराज भिक्षु: जी की पावन प्रेरणा से स्थापित आध्यात्मिक साधना एवं सेवा का प्रमुख केंद्र है। श्रद्धालुओं के अनुसार स्वामी श्री गीतानन्द जी महाराज ने धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र से श्रीमद्भगवद्गीता के सार्वभौमिक संदेश के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु गीता जयंती महोत्सव के आयोजन को नई दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके कारण आज यह आयोजन देश-विदेश के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
मुमुक्षु मंडल ट्रस्ट, हरिद्वार एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक एवं सामाजिक संस्था है, जो पूज्य स्वामी श्री गीतानन्द जी महाराज भिक्षु: जी की शिक्षाओं के अनुरूप अध्यात्म, भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, सेवा, सत्संग तथा जनकल्याण के कार्यों के लिए समर्पित है। ट्रस्ट के मार्गदर्शन में देशभर में संचालित श्री गीता धाम एवं श्री गीता कुटीर तपोवन की शाखाओं के माध्यम से नियमित रूप से सत्संग, धार्मिक अनुष्ठान, संस्कार निर्माण एवं सेवा कार्य संचालित किए जाते हैं।
ज्ञातव्य है कि मुमुक्षु मंडल ट्रस्ट के निर्देशानुसार जो श्रद्धालु हरिद्वार स्थित श्री गीता कुटीर तपोवन में गुरु पूर्णिमा के मुख्य आयोजन में सम्मिलित नहीं हो पाते, उनके लिए देशभर की शाखाओं में आषाढ़ पूर्णिमा से पूर्व पड़ने वाले रविवार को व्यास पूजा का आयोजन किया जाता है। इसी क्रम में 26 जुलाई 2026 (रविवार) को कुरुक्षेत्र स्थित श्री गीता धाम आश्रम में यह भव्य आयोजन संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के समापन पर विद्वान ब्राह्मणों, संत-महात्माओं एवं हजारों श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं का कहना था कि गुरु कृपा से ओत-प्रोत यह महोत्सव उनके जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन गया और वे अगले वर्ष की व्यास पूजा की प्रतीक्षा अभी से करने लगे हैं।

विश्वविख्यात धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र स्थित श्री गीता धाम आश्रम में व्यास पूजा (गुरुपूजा) महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और गुरु महिमा के अनुपम वातावरण में संपन्न, देशभर से उमड़ा श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब

*श्रद्धालुओं ने साझा किए गुरु कृपा के अपने अनुभव*:-

इस अवसर पर मीडिया जंक्शन से बातचीत करते हुए आश्रम के वरिष्ठ एवं वर्षों पुराने श्रद्धालु पंडित आर.के. शर्मा तथा विक्रांत शर्मा (पंचकूला) ने बताया कि वे कई वर्षों से पूज्य सद्गुरुदेव भगवान के श्रीचरणों में अपनी हाजिरी लगाने और सेवा का सौभाग्य प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक दिनों में यहां एक छोटा-सा आश्रम हुआ करता था, लेकिन सद्गुरुदेव की असीम कृपा, श्रद्धालुओं की निष्ठा और सेवाभाव के कारण आज यह आश्रम एक विशाल, भव्य एवं अत्यंत सुंदर आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। यहां नियमित रूप से गौ-सेवा, वृद्ध-सेवा, संत-सेवा तथा मानव सेवा के विविध कार्य निस्वार्थ भाव से संचालित किए जा रहे हैं, जिससे देशभर से आने वाले श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति एवं सेवा का अनुपम अनुभव प्राप्त करते हैं।

वहीं नोएडा से पधारे श्रद्धालु देशराज भटनागर ने बताया कि वे भी लंबे समय से इस आध्यात्मिक परिवार से जुड़े हुए हैं और प्रत्येक वर्ष व्यास पूजा एवं अन्य धार्मिक आयोजनों में सम्मिलित होकर गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि आश्रम का आध्यात्मिक वातावरण, अनुशासन, सेवा और आत्मीयता प्रत्येक श्रद्धालु को बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित करती है।

आश्रम की सेविका कुसुम दीदी ने बताया कि आश्रम में पधारने वाले संत-महात्माओं की सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। प्रतिदिन प्रातःकाल संतों के लिए चाय, ताज़ा रस, ब्रेड, दलिया, पोहा सहित पौष्टिक अल्पाहार की व्यवस्था की जाती है। वहीं सायं ठीक पाँच बजे स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन के साथ लस्सी भी श्रद्धापूर्वक परोसी जाती है। इसके अतिरिक्त देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ एवं सुसज्जित आवास, शुद्ध भोजन, पेयजल तथा अन्य सभी आवश्यक सुविधाओं की उत्कृष्ट व्यवस्था आश्रम द्वारा निःस्वार्थ भाव से उपलब्ध कराई जाती है, जिससे प्रत्येक श्रद्धालु स्वयं को एक आध्यात्मिक परिवार का हिस्सा अनुभव करता है।

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