कनाडा की संस्था ‘चेन ऑफ लाइफ’ के ग्लोबल चैलेंज 2026 के तहत मशोबरा में जागरूकता अभियान

मीडिया जंक्शन-/चंडीगढ़ / विक्रांत /(पुनीत महाजन)
चंडीगढ़/मशोबरा, :- युवा पीढ़ी और परिवारों में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा जीवन बचाने का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कनाडा की संस्था ‘चेन ऑफ लाइफ’ (Chain of Life) के ग्लोबल चैलेंज 2026 के तहत मशोबरा की पहाड़ियों में जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। इस अभियान में चंडीगढ़ के लिवर ट्रांसप्लांट प्राप्तकर्ता परवीन कुमार रतन और उनकी पत्नी एवं लिविंग लिवर डोनर रूपा अरोड़ा ने लगातार चौथे वर्ष भारत में इस मुहिम को आगे बढ़ाया।
इस दंपति की कहानी प्रेम, त्याग और मानवता की प्रेरणादायक मिसाल है। वर्ष 2011 में रूपा अरोड़ा ने अपने पति की जान बचाने के लिए अपने लिवर का 65 प्रतिशत हिस्सा दान किया था। लिवर ट्रांसप्लांट के बाद नया जीवन पाने वाले परवीन कुमार रतन और उनकी पत्नी ने अपनी व्यक्तिगत जीवन यात्रा को अंगदान जागरूकता के सामाजिक अभियान में बदल दिया।
भारत में इस पहल का सफर वर्ष 2022 में कसौली से शुरू हुआ। इसके बाद 2024 में करोल टिब्बा, 2025 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी और 2026 में मशोबरा की पहाड़ियों में इस अभियान को आगे बढ़ाया गया। वर्ष 2026 में ‘चेन ऑफ लाइफ’ संस्था अपनी स्थापना के 20 वर्ष भी पूरे कर रही है।
युवाओं और परिवारों में अंगदान के प्रति जागरूकता पर जोर
अभियान का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी और परिवारों में अंग एवं ऊतक दान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, ताकि इस संवेदनशील विषय पर सही जानकारी के साथ खुलकर चर्चा हो सके। युवाओं को अंगदान के महत्व, जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन देने में इसकी भूमिका तथा परिवार के सदस्यों के बीच अंगदान को लेकर संवाद की आवश्यकता के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
अभियान का संदेश है कि युवाओं को केवल जागरूक करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपने परिवारों और समाज में भी इस विषय पर सकारात्मक चर्चा के लिए प्रेरित करना जरूरी है। सही जानकारी और पारिवारिक संवाद से अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने तथा समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में मदद मिल सकती है।
युवाओं ने संभाली जागरूकता अभियान की कमान
इस वर्ष के कार्यक्रम में युवाओं की सक्रिय भागीदारी विशेष आकर्षण रही। परवीन कुमार रतन और रूपा अरोड़ा की बेटी मनिका रतन, जो थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, पटियाला में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष की छात्रा हैं, ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के विद्यार्थी रुत्वा शर्मा के साथ अभियान में योगदान दिया। इनके साथ पंजाब यूनिवर्सिटी के लॉ विभाग में अध्ययनरत अभिनव शर्मा ने भी अंगदान जागरूकता का संदेश आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मनिका ने अपने माता-पिता की ट्रांसप्लांट यात्रा को बचपन से करीब से देखा है। वर्ष 2019 में वह अपने माता-पिता के साथ विश्व ट्रांसप्लांट गेम्स में भाग लेने के लिए यूनाइटेड किंगडम भी गई थीं। आज वह स्वयं युवा पीढ़ी को अंगदान के महत्व के प्रति जागरूक करने में योगदान दे रही हैं।
युवाओं की यह भागीदारी दर्शाती है कि नई पीढ़ी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और जीवन बचाने के संदेश को अपने परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों और समुदायों तक पहुंचाने के लिए आगे आ रही है।
समाज के विभिन्न वर्गों ने दिया सहयोग
कार्यक्रम में पंजाब सरकार के स्वास्थ्य विभाग से फार्मासिस्ट रमन शर्मा, उनके पति राकेश कुमार, पंजाब सरकार के शिक्षा विभाग की वरिष्ठ अधिकारी सुमन शर्मा, नर्सों, ट्रांसप्लांट प्राप्तकर्ताओं तथा अन्य समुदाय सदस्यों ने भी भाग लिया। सामाजिक कार्य में स्नातकोत्तर रणविजय सिंह ने फिल्म निर्माण, डिजिटल संचार और सोशल मीडिया के माध्यम से इस अभियान के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में सहयोग दिया।
परवीन और रूपा के बेटे आद्विक रतन ने कार्यक्रम के दौरान तस्वीरें खींचीं और वीडियो रिकॉर्ड किए। उनका इस अभियान में शामिल होना भी विशेष भावनात्मक महत्व रखता है, क्योंकि उनका जन्म पिता के लिवर ट्रांसप्लांट के बाद हुआ था। यह इस बात का प्रतीक है कि अंगदान से मिला जीवन एक परिवार ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है।
‘अंगदान के लिए दबाव नहीं, सही जानकारी जरूरी’
कनाडा के क्यूबेक में स्थापित ‘चेन ऑफ लाइफ’ की संस्थापक एवं अध्यक्ष लूसी ड्यूमोंट की पहल का मूल सिद्धांत है कि युवाओं को अंगदान के लिए बाध्य करने के बजाय उन्हें सही जानकारी और वैज्ञानिक समझ प्रदान की जाए, ताकि वे स्वयं विचार कर सकें और अपने परिवारों के साथ इस विषय पर खुलकर बातचीत कर सकें।
इस अभियान का उद्देश्य अंग एवं ऊतक दान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को स्वास्थ्य संरक्षण, अंग विफलता की रोकथाम और मानवीय संवेदनाओं के प्रति जिम्मेदार बनाना भी है।
परवीन कुमार रतन और रूपा अरोड़ा का मानना है कि अंगदान केवल किसी व्यक्ति को नया जीवन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव परिवारों, समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है। उनका संदेश है कि अंगदान पर सही जानकारी के आधार पर बातचीत होनी चाहिए और युवाओं को जागरूक करने के लिए स्कूलों, कॉलेजों तथा परिवारों को आगे आना चाहिए।
‘चेन ऑफ लाइफ ग्लोबल चैलेंज 2026’ का संदेश स्पष्ट है—युवाओं को शिक्षित करें, परिवारों को जागरूक बनाएं और जीवन बचाने की संभावनाओं को मजबूत करें।

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