विक्रांत शर्मा ब्यूरो चीफ/मीडिया जंक्शन-/चंडीगढ़ :
पवित्र नवरात्रों के अवसर पर कार्यक्रम की शुरुआत माता रानी के दो भक्ति गीतों “मेरे कंठ बसो महारानी” और “जगदीश्वरी सर्वेश्वरी” से हुई, जिन्हें सुप्रसिद्ध गायिका डॉ. कोमल चुघ ने बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया। इसके बाद, सुशील नागपाल ने जगजीत सिंह का एकल गीत “कौन आएगा यहाँ” गाया। उन्होंने प्रियंका के साथ मिलकर दो युगल गीत “गम का खजाना तेरा भी है मेरा भी” और “पहले तो अपने दिल की लगी जान जाइये” गाकर उनके साथ पूरा न्याय किया। प्रियंका ने चित्रा सिंह का एकल गीत “कभी तो खुल के बरस” भी बड़ी खूबसूरती से गाया।
चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी, चंडीगढ़ (CSNA), प्रसिद्ध पंजाबी लोक गायिका और अकादमी की अध्यक्ष डॉ. सुखमिंदर कौर बराड़ (जिन्हें ‘सुखी बराड़’ के नाम से जाना जाता है) के नेतृत्व में युवा गायन प्रतिभाओं को तराशने का काम कर रही है। इसी क्रम में अकादमी द्वारा प्रशिक्षित गायिका सुखमनी ने “मंजिल ना दे चिराग ना दे हौसला तो दे” गाकर अपनी प्रस्तुति दी। इसके बाद एक और प्रतिभाशाली गायिका जसरीत ने “वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी” गाया। अकादमी की ही प्रशिक्षित गायिका ममता गैरी चावला ने “तुम को देखा तो ये ख्याल आया” गाकर अपनी गायन कला का प्रदर्शन किया।
बहुत ही कम समय में संगीत प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचने वाली किशोर गायिका नैन्सी ने लता मंगेशकर की प्रसिद्ध गज़ल “रस्म-ए-उल्फ़त को निभाएं तो निभाएं कैसे” गाकर सभी को बेहद प्रभावित किया।
आयोजकों की इस पहल की सराहना करते हुए, मुख्य अतिथि सुरिंदर वर्मा, अध्यक्ष, सिटीजन अवेयरनेस ग्रुप, ने कहा, “संगीत एक ऐसा शाश्वत पुल है जो दिलों, भावनाओं और पीढ़ियों को आपस में जोड़ता है। लता मंगेशकर जी की मधुर धुनें और जगजीत सिंह जी की रूह को छू लेने वाली गज़लें भारत की संगीत विरासत का एक अमूल्य हिस्सा हैं। ऐसी संगीतमय शामें न केवल इन महान कलाकारों को श्रद्धांजलि देती हैं, बल्कि उनकी कभी न भूलने वाली विरासत को युवा पीढ़ियों के लिए भी जीवित रखती हैं। ‘महफिल-ए-म्यूजिक’ भारतीय संगीत की समृद्धि और इसे अमर बनाने वाली भावनाओं का उत्सव मनाने की एक बेहद खूबसूरत पहल है।”
