चंडीगढ़ प्रशासन ने स्वीकार किया कि 33 सरकारी पोर्टल अब भी असुरक्षित; हाईकोर्ट ने साइबर सुरक्षा उन्नयन के लिए 6 माह की समय-सीमा तय की

चंडीगढ़, मिडिया जंक्शन/बलतेज ब्यूरो चीफ) :- पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका (CWP-PIL-162-2026) का निपटारा करते हुए चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा दायर शपथ-पत्र (Affidavit) को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें प्रशासन ने स्वीकार किया कि उसकी 127 सरकारी वेबसाइटों एवं पोर्टलों में से 33 अभी भी बिना एन्क्रिप्शन (HTTPS) के पुराने डिजिटल ढांचे पर संचालित हो रहे हैं। यूटी चंडीगढ़ के सूचना प्रौद्योगिकी निदेशक ने खंडपीठ को बताया कि यह स्थिति राज्य डेटा सेंटर के व्यापक उन्नयन कार्य के कारण है तथा उन्होंने आश्वासन दिया कि शेष सभी वेबसाइटों और पोर्टलों को 5 से 6 माह के भीतर पूर्णतः सुरक्षित (HTTPS-सक्षम) कर दिया जाएगा।

23 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान यूटी चंडीगढ़ के सूचना प्रौद्योगिकी निदेशक ने एक स्थिति रिपोर्ट (Status Report) प्रस्तुत की, जिसमें पुष्टि की गई कि 127 सरकारी वेबसाइटों एवं पोर्टलों में से 33 अभी भी असुरक्षित हैं। प्रशासन ने राज्य डेटा सेंटर के उन्नयन कार्य को पूरा करने और शेष डिजिटल अवसंरचना को सुरक्षित बनाने के लिए न्यायालय से अतिरिक्त 5 से 6 माह का समय मांगा।

इस जनहित याचिका की पैरवी स्वयं अधिवक्ता Raja Vikrant Sharma, जो एक साइबर & डिजिटल प्राइवेसी वकील हैं, ने की। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 38 का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि असुरक्षित सरकारी पोर्टलों का संचालन नागरिकों के निजता के मौलिक अधिकार (Right to Privacy), सुरक्षित डिजिटल पहुंच के अधिकार (Right to Digital Access) तथा शिक्षा के अधिकार (Right to Education) का गंभीर उल्लंघन है।

याचिका सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act), 2016 तथा डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act), 2023 के वैधानिक प्रावधानों के तहत दायर की गई। इसमें बताया गया कि छात्रों के केंद्रीकृत प्रवेश पोर्टल तथा मोबाइल एप्लिकेशन सहित अत्यंत संवेदनशील नागरिक डेटा का प्रसंस्करण बिना मानक एन्क्रिप्शन और भारत सरकार की Guidelines for Indian Government Websites (GIGW 3.0) का पालन किए किया जा रहा था।
अपने अंतिम आदेश में खंडपीठ ने राज्य डेटा सेंटर के उन्नयन के लिए प्रशासन द्वारा प्रस्तुत समय-सीमा को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्पष्ट अपेक्षा व्यक्त की:
“We also expect the authorities to ensure compliance with the guidelines issued by the Central Government for the said purposes.”

याचिकाकर्ता Raja Vikrant Sharma ने कहा है कि वे न्यायालय द्वारा दर्ज 6 माह की समय-सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए पूरे मामले की निगरानी करेंगे, ताकि चंडीगढ़ प्रशासन शेष 33 पोर्टलों को सुरक्षित बनाए तथा राज्य डेटा सेंटर का उन्नयन समय पर पूरा कर नागरिकों की डिजिटल गोपनीयता की रक्षा करे। यदि प्रशासन न्यायालय द्वारा दर्ज इस समय-सीमा का पालन करने में विफल रहता है, तो वे अवमानना याचिका (Contempt Petition) दायर कर न्यायालय के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।

इस प्रक्रिया के पूर्ण होने पर चंडीगढ़ भारत का पहला केंद्र शासित प्रदेश/राज्य बनने की दिशा में अग्रसर होगा, जो भारत सरकार की GIGW 3.0 दिशानिर्देशों के अनुरूप अपनी सरकारी वेबसाइटों और डिजिटल अवसंरचना को सुलभ (Accessible), समावेशी (Inclusive) और सुरक्षित (Secure) बनाएगा।

क्या होती है GIGW 3.0 गाइडलाइंस?

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा तैयार किए गए GIGW 3.0 दिशा-निर्देश यह तय करते हैं कि भारत सरकार की वेबसाइटें कैसे बनाई जानी चाहिए। इसके मुख्य लाभों में नागरिक डेटा की सुरक्षा के लिए अनिवार्य साइबर सुरक्षा, दिव्यांग उपयोगकर्ताओं के लिए सख्त पहुंच (accessibility) मानक और मोबाइल-अनुकूल डिज़ाइन शामिल हैं। यह सुनिश्चित करता है कि डिजिटल सार्वजनिक सेवाएं सभी के लिए सुरक्षित, समावेशी और उपयोगकर्ता-केंद्रित हों।

किस बारे थी PIL?

चंडीगढ़ प्रशासन की साइबर सुरक्षा को लेकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका (PIL) में अधिवक्ता RajaVikrant Sharma ने दावा किया है कि प्रशासन की बहुत सारी सरकारी वेबसाइटें अब भी HTTPS सुरक्षा के बिना संचालित हो रही हैं, जिनमें पुलिस, स्वास्थ्य, परिवहन, वित्त और उच्च शिक्षा विभाग के पोर्टल शामिल हैं।
याचिका का प्रमुख मुद्दा उच्च शिक्षा विभाग का केंद्रीकृत प्रवेश पोर्टल है, जो वर्ष 2020 से HTTP पर संचालित होने का आरोप है। इस पोर्टल पर छात्र आधार, अंकतालिकाएँ, प्रमाणपत्र, मोबाइल नंबर और अन्य संवेदनशील जानकारी अपलोड करते हैं, जिससे उनके डेटा की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।

RajaVikrant Sharma ने इस साइबर सुरक्षा खामी के संबंध में चंडीगढ़ प्रशासन को कई बार लिखित अभ्यावेदन भेजे और समय रहते कार्रवाई करने का आग्रह किया, लेकिन प्रशासन ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया तथा उसी असुरक्षित पोर्टल पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने आरटीआई के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर जनहित याचिका दायर की।
आरटीआई से यह भी सामने आया कि चंडीगढ़ यूटी डेटा सेंटर का अधिकांश बुनियादी ढांचा End of Life (EOL) की स्थिति में पहुँच चुका है। प्रशासन ने अदालत को बताया कि डेटा सेंटर का उन्नयन किया जा रहा है और अगले 2–3 महीनों में सभी सरकारी वेबसाइटों को HTTPS-सक्षम प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

यूटी प्रशासन ने राज्य डेटा सेंटर के पुराने आईटी ढांचे को देरी का कारण बताया; हाईकोर्ट ने शेष पोर्टलों को सुरक्षित करने के लिए 6 माह की समय-सीमा दर्ज की।


इस जनहित याचिका के परिणामस्वरूप चंडीगढ़ प्रशासन के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत SPIC के माध्यम से कई महत्वपूर्ण तकनीकी एवं प्रशासनिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई। इनमें जूनियर प्रोग्रामर, नेटवर्क इंजीनियर, टेक्नीशियन/डेटा प्रोसेसिंग एसोसिएट, सेक्शन ऑफिसर, सीनियर असिस्टेंट, क्लर्क-कम-स्टेनोग्राफर तथा मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS) के पद शामिल हैं। इन भर्तियों का उद्देश्य प्रशासन के आईटी ढांचे को सुदृढ़ करना तथा जनहित याचिका में उठाए गए साइबर सुरक्षा सुधारों और डिजिटल सुशासन संबंधी उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना है।

 

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