अवैध धर्मांतरण पर बढ़ा खतरा, पंजाब बचाओ मोर्चा ने एंटी-कन्वर्ज़न बिल की उठाई मांग

चंडीगढ़(मीडिया जंक्शन-/रोशन शर्मा/अवतार सैनी):-, बढ़ते अवैध धर्मांतरण के मामलों को रोकने और समाज में फैल रही भ्रमितकारी धार्मिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पंजाब बचाओ मोर्चा ने आज चंडीगढ़ प्रेस क्लब में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। मोर्चा अध्यक्ष तेजस्वी मिन्हास की अगुवाई में हुई इस वार्ता में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए कई ईसाई पादरी और सामाजिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

मोर्चा ने स्पष्ट रूप से कहा कि कुछ स्वयंभू (सेल्फ क्लेम्ड) ‘ईसाई पादरी’ जादू-टोने, झूठे चमत्कारों, लालच और धोखे का सहारा लेकर कमजोर वर्गों को बहला-फुसलाकर धर्म बदलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह न केवल संविधान की भावना के खिलाफ है, बल्कि समाज की साम्प्रदायिक संरचना को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। समाचार रिपोर्टों और हालिया घटनाओं को आधार बनाते हुए वक्ताओं ने कहा कि अब पंजाब में कानून बनाना समय की तात्कालिक आवश्यकता है।

सम्मेलन में उपस्थित ईसाई पादरियों ने तेजस्वी मिन्हास तथा पंजाब बचाओ मोर्चा के प्रयासों को खुला समर्थन देते हुए कहा कि ऐसे भ्रामक डेरे असली ईसाई धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करते। उन्होंने कहा कि ईसाई धर्म में तथाकथित ‘तुरंत चमत्कार’ या ‘जादुई इलाज’ जैसी कोई मान्यता नहीं, परंतु कुछ अनधिकृत डेरे बीमार और परेशान लोगों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। इन गतिविधियों ने ईसाई धर्म की साख को नुकसान पहुँचाया है, इसलिए इन पर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।

मिन्हास के अनुसार धार्मिक परिवर्तन और इस पृष्ठभूमि से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा के बाद यह स्पष्ट हुआ कि पंजाब में पिछले कुछ वर्षों से बड़े पैमाने पर समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। वर्ष 2001 से 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले लोगों की संख्या में तुलनात्मक रूप से काफी वृद्धि हुई है। 2001 में ईसाई आबादी 1.26% थी, जो बढ़कर 2011 में 1.26% ही रही, परन्तु अन्य सूत्रों के अनुसार यह संख्या लगभग 65,000 तक परिवर्तित व्यक्तियों से बढ़कर अब लगभग 3,48,230 तक पहुँच चुकी है।

उन्होंने कहा कि सरकार पैमाने के आधार पर 65,000 लोगों की आबादी को मानती है, लेकिन जमीनी स्तर पर 4,00,000 से अधिक लोग ईसाई धर्म अपनाने की गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं। यह चिंताजनक है कि साल 2011 में ईसाई धर्म के तहत पहचान करने वालों की संख्या से कहीं अधिक लोग इस धर्मांतरण प्रक्रिया का हिस्सा बने हैं। इसका कारण यह है कि बड़ी संख्या में परिवर्तित लोग अभी भी अपनी जाति को लेकर लालच प्रवृत्ति के चलते परिवर्तन को छुपाकर रखते हैं।

 

मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कठोर कदम न उठाए गए तो ये अवैध रूपांतरण पंजाब की सामाजिक समरसता को गहरी चोट पहुँचाएँगे। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार एंटी-कन्वर्जन बिल लागू करे, अवैध डेरों की फंडिंग और विदेशी प्रभाव की जांच कराए तथा चमत्कारों/जादुई उपचार के झूठे प्रचार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए।

पंजाब बचाओ आंदोलन ने मांग की है कि पंजाब में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया जाए और धार्मिक जागरणों व प्रचार गतिविधियों को सरकारी नियंत्रण में लाया जाए। विदेशों के लिए धर्म-पर्यटन पर प्रतिबंध और पादरियों के लिए विशेष परमिट लागू करने की आवश्यकता बताई गई है। साथ ही अनधिकृत आस्था-चिह्न हटाने, विदेशी धार्मिक दबावों का मुकाबला करने और भड़काऊ धार्मिक राजनीति करने वालों की पहचान की मांग भी शामिल है।

इस अवसर पर सुखजिंदर गिल, महासचिव मसीह एकता सभा बैनर एवं कैथोलिक चर्च के सदस्य तथा जनहित सेवा एनजीओ के अध्यक्ष; आर.टी. रेव. डॉ. अल्फ्रेड जेम्स, चेयरमैन सीटीएसएमआईसीटी जालंधर और क्रिश्चियन रिलिजियस एसोसिएशन पंजाब के मेंटर; जगदीश मसीह, अध्यक्ष नेशनल क्रिश्चियन लीग; तेजस्वी मिन्हास, अध्यक्ष पंजाब बचाओ मोर्चा; एडवोकेट विशाल विनायक एवं विशाल विनायक, दोनों सदस्य पंजाब बचाओ मोर्चा; तथा पदमदीप, सदस्य पंजाब बचाओ मोर्चा, प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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