चंडीगढ़, (मीडिया जंक्शन-/विक्रांत शर्मा):-साहित्य, समाज और परिवर्तन के बीच संवाद को केंद्र में रखते हुए त्रैमासिक पत्रिका ‘साहित्यिक परिदृश्य’ का लोकार्पण बुधवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में किया गया। अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ, हिमाचल प्रदेश की ओर से आयोजित समारोह में क्षेत्र के साहित्यकारों, लेखकों, पत्रकारों और साहित्यप्रेमियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार एवं ‘वर्तमान साहित्य’ के संपादक डॉ. संजय श्रीवास्तव मुख्य अतिथि रहे, जबकि जयपुर से प्रकाशित ‘धरती’ के संपादक एवं आलोचक शैलेन्द्र चौहान विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। आलोचक एवं चिंतक डॉ. वैभव सिंह भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत हिमाचल प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष लेख राम वर्मा, सुरेश वर्मा द्वारा गाए क्रांतिकारी गीत से हुई।
पत्रिका के संपादक देवेंद्र धर ने ‘साहित्यिक परिदृश्य’ की परिकल्पना और उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पत्रिका साहित्य को समाज के व्यापक सरोकारों और समकालीन बदलावों से जोड़ने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि पत्रिका का उद्देश्य रचनात्मक अभिव्यक्ति के साथ-साथ विचार और संवाद के लिए एक सार्थक मंच उपलब्ध कराना है।
इस अवसर पर डॉ. वैभव सिंह ने समकालीन परिस्थितियों में साहित्य की भूमिका और लेखक की सामाजिक जिम्मेदारी पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि साहित्य अपने समय को दर्ज करने के साथ-साथ उससे सवाल करने और नई चेतना पैदा करने का माध्यम भी है।
इसके बाद हुई परिचर्चा में डॉ. हेम राज कौशिक, सतीश धर और राजेन्द्र राजन ने साहित्य और समाज के बदलते संबंधों, प्रगतिशील साहित्य की प्रासंगिकता, डिजिटल माध्यमों के प्रभाव तथा आज की साहित्यिक पत्रिकाओं की भूमिका पर विचार साझा किए।
डॉ. श्रीवास्तव और शैलेन्द्र चौहान ने पत्रिका के प्रकाशन को साहित्यिक विमर्श को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
आयोजकों ने उम्मीद जताई कि ‘साहित्यिक परिदृश्य’ साहित्यकारों और पाठकों के बीच संवाद का एक जीवंत मंच बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
