पंचकूला (मीडिया जंक्शन/सुरेंद्र नेगी) – सेक्टर-5 स्थित इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में आयुर्वेद महोत्सव 2025 का शुभारंभ अत्यंत भव्य और गरिमामय वातावरण में हुआ। हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष तथा लेडी गवर्नर ने संयुक्त रूप से रिबन काटकर तीन दिवसीय समारोह की शुरुआत की। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार तरुण भंडारी भी विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। आयोजन के पहले ही दिन आम जनता की भारी भीड़ देखने को मिली। लोग बड़ी संख्या में आयुर्वेद से संबंधित जानकारी लेने पहुंचे और प्रदर्शनी में लगे स्टॉलों से आयुर्वेदिक उत्पाद खरीदते हुए भी दिखाई दिए। उपस्थित लोगों में आयुर्वेद के प्रति गहरी रुचि और जागरूकता देखने को मिली।
राज्यपाल असीम कुमार घोष ने अपने संबोधन में कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार प्रणाली नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवनशैली है, जो मन, शरीर और आत्मा को संतुलित बनाए रखती है। उन्होंने कहा कि आज की बदलती जीवनशैली और बढ़ती बीमारियों के बीच आयुर्वेद सबसे प्रभावी और भरोसेमंद चिकित्सा पद्धति बनकर उभर रहा है। उन्होंने इसे भविष्य की वैश्विक चिकित्सा बताते हुए कहा कि भारत के पास इस क्षेत्र में नेतृत्व की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं। राज्यपाल ने समारोह के दौरान आयुर्वेद में विशिष्ट योगदान देने वाले संस्थानों और विशेषज्ञों को सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार तरुण भंडारी ने कहा कि आने वाला समय पूरी तरह आयुर्वेद का होगा। उन्होंने बताया कि हमारे बुजुर्ग प्राकृतिक चिकित्सा और घरेलू उपचारों पर भरोसा करते थे, और आज वैज्ञानिक प्रमाण भी आयुर्वेद की प्रभावशीलता को सिद्ध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को आधुनिक तकनीक, नवीन शोध और वैश्विक मानकों से जोड़कर इसे दुनिया की मुख्यधारा चिकित्सा प्रणाली बनाया जा सकता है। सम्मेलन के संरक्षक वैद्य राकेश शर्मा ने कहा कि यह महोत्सव समग्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा। उनके अनुसार देशभर से आए विशेषज्ञ अपने शोध, अनुभव और आधुनिक दृष्टिकोण साझा कर रहे हैं, जिससे आयुर्वेद का वैज्ञानिक आधार और भी मज़बूत बनेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख विशेषज्ञों में संजय टंडन, अजीत पाल सिंह, संचित शर्मा, तरनजीत सिंह भरना, रामपाल सोमानी और हितेश जानी शामिल रहे। इन सभी विशेषज्ञों ने आयुर्वेद की आधुनिक दिशा, तकनीकी उन्नति और वैश्विक संभावनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ी। महोत्सव के सफल संचालन में आयोजन टीम का विशेष योगदान रहा, जिसमें ऋषभ दीक्षित, जय सोनी, मन्या दीक्षित, योगिता भाटी और शिधि मिश्रा शामिल रहे। उनकी योजनाबद्ध कार्यशैली और बेहतर समन्वय के कारण महोत्सव का संचालन पहले ही दिन से सुव्यवस्थित और प्रभावशाली रहा।
प्रदर्शनी में 4000 से अधिक चिकित्सक, देशभर से आए आयुर्वेदाचार्य और 100 से अधिक औषधि निर्माता अपनी शोध आधारित औषधियाँ और तकनीकें प्रदर्शित कर रहे हैं। वहीं निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, योग सत्र, परामर्श केंद्र और दवा वितरण स्टॉलों पर पूरे दिन भारी भीड़ उमड़ी रही, जिससे आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ। पंचकूला में आयोजित यह महोत्सव न केवल आयुर्वेद की वैज्ञानिकता को जन–जन तक पहुँचा रहा है, बल्कि लोगों में प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति नया विश्वास और जागरूकता भी पैदा कर रहा है।
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